सतत भविष्य की राह दिखाएगा बाहरा विश्वविद्यालय: ‘एडवांस्ड मटेरियल्स’ पर जुटेगा देश भर के वैज्ञानिकों का महाकुंभ |

विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में मील का पत्थर स्थापित करते हुए बाहरा विश्वविद्यालय शिमला हिल्स आगामी 10 और 11 सितंबर 2026 को एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज’ की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘सतत भविष्य के लिए एडवांस्ड मटीरियल्स और सिमुलेशन तकनीकों पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ है।
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का आयोजन ‘इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सोसाइटी ऑफ इंडिया’ (उत्तर क्षेत्र ) विशेष सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन के संयोजक प्रो. गगन कुमार भार्गव ने बताया कि इस आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य उन्नत सामग्री विज्ञान और आधुनिक सिमुलेशन तकनीकों में हो रहे वैश्विक शोध को एक साझा मंच प्रदान करना है, ताकि एक सतत और सुरक्षित भविष्य की नींव रखी जा सके।
बौद्धिक विमर्श और नेटवर्किंग का केंद्र इस सम्मेलन में देशभर के जाने-माने वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और उत्साही छात्र शिरकत करेंगे। आयोजन के दौरान ‘की- नोट’ भाषण, तकनीकी सत्र, पोस्टर प्रेजेंटेशन और नेटवर्किंग सत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जाएगी। ये गतिविधियां न केवल प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर देंगी, बल्कि उन्हें अपने मौलिक शोध कार्यों को प्रदर्शित करने का वैश्विक मंच भी प्रदान करेंगी।
युवा शोधकर्ताओं के लिए सुनहरा अवसर आयोजन समिति ने शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से सम्मेलन के मुख्य विषयों पर अपने ‘एब्स्ट्रैक्ट’ आमंत्रित किए हैं।
विशेष रूप से युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए चयनित शोध कार्यों को पोस्टर और तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा।
प्रो. भार्गव के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ‘सतत विकास’ के लिए नई सामग्रियों और सिमुलेशन तकनीकों की भूमिका अपरिहार्य हो गई है। यह सम्मेलन भविष्य के अकादमिक और शोध सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने का एक सशक्त जरिया बनेगा।
विश्वविद्यालय परिसर में सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर हैं। इच्छुक प्रतिभागी अपने शोध सारांश जमा करने और सम्मेलन से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट amstsf2026.bushimla.in पर लॉग-इन कर सकते हैं। बाहरा विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को एक नई दिशा देने की ओर अग्रसर है। सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के व्याख्यानों के साथ-साथ तकनीकी सत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से ज्ञानवर्धक अनुभव प्राप्त होगा।
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